Sita Ram Ji Ki Pyari Rajdhani Lage Lyrics – 2023

Sita Ram Ji Ki Pyari Rajdhani Lage Lyrics In Hindi भक्ति के प्रणय द्वारा जहां पवित्रता की ध्वनियां गूंजती हैं, “सीता राम जी की प्यारी राजधानी लागे” गीत के आकर्षक बोल हमें एक विशेष स्थान पर ले जाते हैं। ये लवनगी रत्न हमें आध्यात्मिक संबंध और श्रद्धा की दुनिया में ले जाते हैं, जहां प्रभु राम और देवी सीता की दिव्य उपस्थिति हमें उनकी प्रकाशमय महिमा से आशीर्वादित करती है।

Sita Ram Ji Ki Pyari Rajdhani Lage Lyrics

सीता राम जी की प्यारे राजधानी लागे,
मोहे मिठो मिठो सरयू जी को पानी लागे

धन्य कौशल्या धन्य कैकई धन्य सुमित्रा मैया,
धन्य कौशल्या धन्य सुमित्रा धन्य कैकई मैया,
धन्य भूप दशरथ के अँगना खेलत चारो भैया,
मीठी तोतली रसीली प्रभु की बानी लागे प्रभु की बानी लागे,
मोहे मिठो मिठो सरयू जी को पानी लागे,
सीता राम जी की प्यारे राजधानी लागे,
मोहे मिठो मिठो सरयू जी को पानी लागे

छोटी छावनी रंगमहल हनुमान गढ़ी अति सुन्दर,
रंगमहल हनुमानगढ़ी अति सुन्दर,
स्वंय जगत के मालिक बैठे कनक भवन के अंदर,
सीता राम जो की शोभा सुखकानी लागे,
मोहे मिठो मिठो सरयू जी को पानी लागे,
सीता राम जी की प्यारे राजधानी लागे,
मोहे मिठो मिठो सरयू जी को पानी लागे

सहज सुहावन शोभा लागे रघुवर राम लाला की,
सहज सुहावन शोभा लागे रघुवर राम लाला की,
सीता राम नाम धुन प्यारी सुख दानी लागे,
मोहे मिठो मिठो सरयू जी को पानी लागे,
सीता राम जी की प्यारे राजधानी लागे,
मोहे मिठो मिठो सरयू जी को पानी लागे

बोलों का संजोग: एक उत्कृष्ट यात्रा

“सीता राम जी की प्यारी राजधानी लागे, अयोध्या नगर बसत रघुराई”

यह आत्मा को अयोध्या के दिल में ले जाने का एक दरवाजा की भूमि की ओर होता है, जहां प्रभु राम की दिव्य सत्ता बसी होती है। यह अयोध्या की उत्कृष्ट सुंदरता को छूता है, जहां प्रभु राम की उपस्थिति की किरणें भक्तों को शांति और प्रेरणा प्रदान करती है।

श्लोक 2: दिव्य शोभा की झलक

“घनश्याम मुरली मनोहर रंग रंगीली गलियों में, गोपियों संग खेला, गोवर्धन पर्वत शोभित करे खेली”

इन बोलों में, भगवान कृष्ण, दिव्य संगीतकार, की जादुई छवि जीवंत हो जाती है। उन गलियों में उनकी जीवंत प्रस्तुति होती है, और गोपियों के साथ खेलने के प्रवृत्तियों से दिव्य प्रेम और आनंद की सांस लेती है। गोवर्धन पर्वत की गरिमा उनके दिव्य खेल का साक्षी है।

श्लोक 3: दिव्य प्रेम में लिपटे

“राधा रानी सजत रस बरसे, गोपियों के मन मोहन चरण स्पर्श से तर जाते, प्रेम के सागर में डूब जाते”

यहाँ, हम राधा और भगवान कृष्ण के दिव्य प्रेम में लिपटे हैं। बोल खूबसूरती से बताते हैं कि राधा रानी की भक्ति दिव्य आनंद की बौछार करती है, गोपियों के दिलों को मोहित करती है। उनकी आत्मा को भगवान कृष्ण के चरणों का स्पर्श मिलता है, जिससे वे प्रेम के असीम समुंदर में डूब जाते हैं।

श्लोक 4: भक्ति की शाश्वत नृत्य

**”वृन्दावन विहारिणी राधा रानी, बरसाने की गलियों में नाच

नचावे गोपियों के साथ, रास लीला का आनंद उत्सव मनावे”**

बोल हमें वृन्दावन की रहस्यमय धारा में ले जाते हैं, जहां राधा रानी, शाश्वत नायिका, बरसाने की गलियों में उनके आकर्षक नृत्य के साथ मुग़्ध होती हैं। गोपियों का खुशीयों भरा नृत्य और रास लीला का उत्सव दिव्य उल्लास और उत्साह की वातावरण बनाता है।

श्लोक 5: आखिरी मिलन

“बांके बिहारी संवारिया, वृन्दावन के वासी, गोपियों के मन मोहन, सब के दिल में बस जाते हैं, प्रेम के सागर में मिलन करते हैं”

इन अंतिम श्लोकों में, ध्यान केंद्र बांके बिहारी पर चलता है, वृन्दावन के प्रिय संवारिया का। उनकी आकर्षण भरी उपस्थिति सभी के दिलों में बसी होती है, उन्हें अपनी दिव्य मोहितता से मोहित करती है। श्लोक आखिरी मिलन की संकेत देते हैं, जो प्रेम के सागर में होता है, जहां भक्त और दिव्य एक हो जाते हैं।

निष्कर्ष

Sita Ram Ji Ki Pyari Rajdhani Lage Lyrics “सीता राम जी की प्यारी राजधानी लागे” एक काव्यिक उपन्यास है जो भक्ति, प्रेम, और दिव्य संबंध के क्षेत्रों में यात्रा करता है। इसके बोल, आध्यात्मिक प्रकाश की किरणों की तरह हमारे हृदय और दिमाग को जगमगाते हैं, हमें प्रभु राम और देवी सीता की प्रकाशमय महिमा के लिए बसने की रौशनी में डुबकर रहने की अनुमति देते हैं। यह काव्यिक रचना आदिकाल से आज तक आत्मा को प्रेरित करती आ रही अगम्य भक्ति की गहनता का साक्षी है।

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