Ganesh Chalisa Lyrics in Hindi – श्री गणेश चालीसा

Ganesh Chalisa Lyrics in Hindi एक प्रमुख हिन्दू धार्मिक ग्रंथ है जिसमें भगवान गणेश की महिमा, गुण और महत्व का वर्णन किया गया है। इस चालीसा में ४० श्लोक होते हैं, जिनमें भगवान गणेश के प्रति भक्ति, श्रद्धा और स्तुति का व्यक्ति किया गया है। यह ग्रंथ गणेश जी की पूजा, पाठ और आराधना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

Ganesh Chalisa Lyrics in Hindi

जय गणपति सदगुण सदन, कविवर बदन कृपाल।
विघ्नहीन करहु हमारी कालधर प्रगट अपार॥

Ganesh Chalisa Lyrics in Hindi अर्थ

  • “जय गणपति सदगुण सदन” यहाँ पर “सदगुण” से तात्पर्य भगवान गणेश के उत्कृष्ट गुणों से है जो उन्हें प्राप्त हैं। “सदन” भगवान के निवास स्थान को सूचित करता है जिसमें उनका आवास होता है।
  • “कविवर बदन कृपाल” यहाँ बताता है कि भगवान गणेश का शरीर विशेष रूप से श्रेष्ठ कवियों की तरह है और वे कृपालु हैं, अर्थात् वे अपने भक्तों पर दयालुता और कृपा करते हैं।
  • “विघ्नहीन करहु हमारी कालधर प्रगट अपार” इस भाग में कहता है कि भगवान गणेश हमारे सभी विघ्नों को दूर करें और कालधर, अर्थात् जब तक के लिए, प्रगट हों ताकि हमारे जीवन में विचारणीय प्रकार से उपस्थित रहें।

ब्रह्मस्वरूप सदा अधिनाथा, दिनानाथ अविचल।
भक्तवत्सल बगुल मुख पर, बिचित्र रूप विचार॥

Ganesh Chalisa Lyrics in Hindi अर्थ

  • “ब्रह्मस्वरूप सदा अधिनाथा” इस श्लोक में बताया गया है कि भगवान गणेश ब्रह्मस्वरूप हैं, अर्थात् वे ब्रह्म की आदिशक्ति हैं और सदा ही आदिनाथ, अर्थात् सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के आदिपति हैं।
  • “दिनानाथ अविचल” इस भाग में यह बताया गया है कि गणेश जी दिनानाथ हैं, अर्थात् हर दिन के नाथ और अविचल, अर्थात् अपरिवर्तनीय हैं।
  • “भक्तवत्सल बगुल मुख पर” इस भाग में यह कहा गया है कि भगवान गणेश भक्तों के प्रति वत्सल हैं, अर्थात् उन्हें अपने भक्तों के प्रति अत्यंत स्नेह हैं और उनके मुख पर बगुल के समान रूप धारण करते हैं। बगुल का मुख बड़ा होता है, और उसके मुख की ओर बगुल कई दिशाओं में झुक सकता है, जिससे यह व्यक्ति के दृष्टिकोण की व्यापकता को दर्शाता है।
  • “बिचित्र रूप विचार” यहाँ पर “बिचित्र” से तात्पर्य गणेश जी के अनूठे और विचित्र रूप से है जो उन्होंने धारण किए हैं। यह उनके अद्भुत और विचित्र रूप को संकेत करता है जिनसे वे अपने भक्तों के दिलों में बसे हैं।
Ganesh Chalisa Lyrics in Hindi

चौरभुज दशासहस्र चनन, शिर चक्र धारी।
कर भूज का कांपत फर आयो, चूड़ामणि प्यारी॥

Ganesh Chalisa Lyrics in Hindi अर्थ

  • “चौरभुज दशासहस्र चनन” इस भाग में कहता है कि भगवान गणेश के चार भुज हैं और उनकी श्रेणी दशहजार है, अर्थात् वे दशहजार भुजों वाले हैं।
  • “शिर चक्र धारी” यहाँ पर श्रीगणेश का शिर चक्र धारण करने की चित्रणा की गई है, जिससे उनके श्रीरूप की महिमा बताई जा रही है।
  • “कर भूज का कांपत फर आयो” इस भाग में बताया गया है कि जब भगवान गणेश की भुजा कांपी तो उनकी माता दुर्गा के चूड़ामणि मणि उन्हें उपहार में प्राप्त हुआ। यह उनके शरणागत भक्तों के प्रति दयालुता का प्रतीक है।
  • “चूड़ामणि प्यारी” इस भाग में बताया गया है कि उनकी माता के चूड़ामणि मणि को गणेश जी ने प्यार से प्राप्त किया, जिससे उनकी माता के प्रति उनका अद्भुत स्नेह प्रकट हो रहा है।

शारद करत सुभाग सुन्दर, कानन कुँडल नाग।
हार प्रेमभुषण सोहत नासिका मुकुट मृगवाग॥

Ganesh Chalisa Lyrics in Hindi अर्थ

  • “शारद करत सुभाग सुन्दर” इस भाग में कहता है कि गणेश जी के चेहरे की खूबसूरती और सुंदरता शारदा देवी के समान है, जो ज्ञान की देवी है।
  • “कानन कुँडल नाग” इस भाग में बताया गया है कि गणेश जी के कानों में कुंडल और सिर पर नाग जड़े हुए हैं, जिनसे उनके रूप की अद्वितीयता और अनूठापन को प्रकट किया जा रहा है।
  • “हार प्रेमभुषण सोहत नासिका मुकुट मृगवाग” इस भाग में कहता है कि गणेश जी के गले में हार और प्रेमभूषण सजे हुए हैं, और उनके सिर पर नासिका मुकुट और मुरारी वाहन के साथ मृगवाग, अर्थात् मुरारि (कृष्ण) का वाहन हिरण के रूप में है, जिससे उनके रूप की रचना की गई है।

अटवि बिमल बिनु सुख विदारी, ब्रह्मादिक आदि सुर।
आत्मन रमाई आवगमन तब, दैत्य दुस्त मुरूर॥

Ganesh Chalisa Lyrics in Hindi अर्थ

  • “अटवि बिमल बिनु सुख विदारी” इस भाग में कहता है कि भगवान गणेश अपने बिना बिमल, अर्थात् विगत बिना, सुख का विदारण करते हैं। यह उनकी विशेष दयालुता और भक्तों के प्रति स्नेह को दर्शाता है।
  • “ब्रह्मादिक आदि सुर” इस भाग में कहता है कि भगवान गणेश ब्रह्मा आदि देवताओं के समान हैं, अर्थात् वे देवताओं के प्रमुख हैं।
  • “आत्मन रमाई आवगमन तब” इस भाग में यह बताया गया है कि जब भगवान गणेश आत्मा में रमाने लगते हैं और व्यक्ति के अंतरात्मा में प्रकट होते हैं, तब दैत्यों की मन्नत बिगड़ जाती है और उनकी नाश होता है।
  • “दैत्य दुस्त मुरूर” यहाँ पर दैत्यों के बारे में कहता है, जिन्हें भगवान गणेश की शक्ति और प्रेम से नष्ट किया जा सकता है। “मुरूर” का अर्थ होता है नाशनीय या नष्टि करने वाला।

धनीश बुद्धि बल दयाला, विकट रूप धरि।
मोहिनी मूरति करिम सोहि, नाम भये सरिस जरि॥

Ganesh Chalisa Lyrics in Hindi अर्थ

  • “धनीश बुद्धि बल दयाला” इस भाग में बताया गया है कि भगवान गणेश बुद्धिमान, बलवान और दयालु हैं। वे अपने भक्तों को धन, बुद्धि और बल के साथ संवर्धित करते हैं।
  • “विकट रूप धरि” यहाँ पर बताया गया है कि भगवान गणेश ने विकट रूप धारण किया, अर्थात् उन्होंने अपने दिव्य रूप का प्रदर्शन किया। विकट रूप उनकी दैवी शक्तियों का प्रतीक है।
  • “मोहिनी मूरति करिम सोहि” इस भाग में बताया गया है कि भगवान गणेश की मोहिनी मूर्ति, अर्थात् आकर्षणीय रूप, विशेष रूप से करिम हैं, जिससे उनकी महिमा का वर्णन किया जाता है।
  • “नाम भये सरिस जरि” इस भाग में बताया गया है कि भगवान गणेश के नाम से सरिस, अर्थात् दुष्टता और भय, जरि अर्थात् हरिणी (हरि: श्रीहरि, भगवान) के साथ नष्ट हो जाते हैं, जिससे उनके नाम की महिमा और शक्ति को दर्शाता है।

अष्टसिद्धि नौ निधि के दाता, अस वर दीनजन।
मन वांछित फल पावत सेवक नर बिलम।

Ganesh Chalisa Lyrics in Hindi अर्थ

  • “अष्टसिद्धि नौ निधि के दाता” इस भाग में कहता है कि भगवान गणेश नौ निधियों के दाता हैं, अर्थात् वे अपने भक्तों को अष्टसिद्धियों का आशीर्वाद प्रदान करते हैं जो भाग्यशाली होते हैं।
  • “अस वर दीनजन” इस भाग में कहता है कि भगवान गणेश दीनजनों को आशीर्वादित करते हैं, अर्थात् वे उनकी दीनता और प्रार्थनाओं का समर्थन करते हैं।
  • “मन वांछित फल पावत सेवक नर बिलम” इस भाग में कहता है कि भगवान गणेश उन सेवकों को मनःपूर्वक वांछित फल प्रदान करते हैं जो उनकी पूजा-अर्चना करते हैं। वे अपने भक्तों की मनोबल और साहस को बढ़ाते हैं।

जय गणेश विद्यासुखदाता, जय सिद्धि बुद्धि पाल।
जय सुखकर्ता दुखहर्ता, जय जग पालनकार॥

Ganesh Chalisa Lyrics in Hindi अर्थ

  • “जय गणेश विद्यासुखदाता” इस भाग में कहता है कि भगवान गणेश विद्या के सुखकर्ता हैं, अर्थात् वे अपने भक्तों को विद्या के सुख प्रदान करते हैं और उन्हें विद्या में सफलता प्राप्त करने में सहायता करते हैं।
  • “जय सिद्धि बुद्धि पाल” यहाँ पर बताया गया है कि भगवान गणेश सिद्धि और बुद्धि के पालक हैं, अर्थात् वे अपने भक्तों को सिद्धि और बुद्धि की प्राप्ति में सहायता करते हैं और उन्हें उन दोनों के गुणों का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
  • “जय सुखकर्ता दुखहर्ता” इस भाग में कहता है कि भगवान गणेश सुख का कर्ता हैं और दुख को हरने वाले हैं, अर्थात् वे अपने भक्तों को सुख प्रदान करते हैं और उनके दुखों को दूर करते हैं।
  • “जय जग पालनकार” यहाँ पर कहता है कि भगवान गणेश जगत के पालनकर्ता हैं, अर्थात् वे सम्पूर्ण जगत की सृजनाता और पालक हैं।

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा, राम मिलाय राजपद।
तुम्हरो मन्त्र बिभीषन माना, लंकेश्वर भए सखा॥

Ganesh Chalisa Lyrics in Hindi अर्थ

  • “तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा” इस भाग में कहता है कि भगवान गणेश ने सुग्रीव के प्रति उपकार किया, अर्थात् उन्होंने सुग्रीव की सहायता की और उनका साथ दिया।
  • “राम मिलाय राजपद” यहाँ पर बताया गया है कि भगवान गणेश ने सुग्रीव की मदद से राम को उनके राज्य पद में पुनः स्थापित किया, अर्थात् उन्होंने राम को उनके राजपद में पुनर्नियुक्त किया।
  • “तुम्हरो मन्त्र बिभीषण माना” इस भाग में कहता है कि भगवान गणेश के मन्त्र को बिभीषण ने माना, अर्थात् उन्होंने भगवान गणेश की उपदेशना का पालन किया और उनके सिद्धांतों का अनुसरण किया।
  • “लंकेश्वर भए सखा” इस भाग में कहता है कि भगवान गणेश की कृपा से बिभीषण लंका के नेता बने, अर्थात् उन्होंने बिभीषण की उनके साथ दोस्ती की और उन्हें अपने सखा बनाया।

सुग्रीव साका मर्कट मोनी, कहत हैं बचन बरी।
लंका जारी सिया सुधी लंका, जै बोले उर द्वारी॥

Ganesh Chalisa Lyrics in Hindi अर्थ

  • “सुग्रीव साका मर्कट मोनी, कहत हैं बचन बरी।” इस भाग में कहता है कि सुग्रीव और मर्कट मोनी (वानरराजा हनुमान) बरी, अर्थात् पवित्र, वचनों का पालन करते हैं।
  • “लंका जारी सिया सुधी लंका, जै बोले उर द्वारी॥” यहाँ पर कहता है कि जब सीता माता ने उर में भगवान राम का नाम लिया, तो लंका जली, अर्थात् रावण की लंका नष्ट हो गई।

जय जय जय हनुमान गोसाईं, कृपा करहु गुरुदेव।
कणजनक सुत भए सखा, पुरन तनय संतन॥

Ganesh Chalisa Lyrics in Hindi अर्थ

  • “जय जय जय हनुमान गोसाईं” इस भाग में कहता है कि हे हनुमान गोसाईं, तुमको तिनों योग में जय करता हूँ।
  • “कृपा करहु गुरुदेव” यहाँ पर भक्त गुरुदेव हनुमान से उनकी कृपा करने की प्रार्थना कर रहे हैं।
  • “कणजनक सुत भए सखा” इस भाग में कहता है कि हनुमान गुरुदेव के सखा बने, जिनके पिता कणजनक थे, अर्थात् जिनके पिता का नाम कणजनक था।
  • “पुरन तनय संतन” इस भाग में कहता है कि हनुमान गुरुदेव के पुरन, अर्थात् तनय, और संतान बने हैं।

संत की सेवा, सब करहीं, संतन की आपा।
तीनों लोक है तुम्हारे, यह दुख दुर्गति न जाय॥

Ganesh Chalisa Lyrics in Hindi अर्थ

  • “संत की सेवा, सब करहीं” इस भाग में कहता है कि संत की सेवा को सभी करते हैं, अर्थात् संतों के प्रति श्रद्धाभक्ति रखने वाले उनकी सेवा करते हैं।
  • “संतन की आपा” इस भाग में कहता है कि संत के परमप्रिय होने के कारण संत के संतान (शिष्य) भी परमप्रिय होते हैं।
  • “तीनों लोक है तुम्हारे” इस भाग में कहता है कि संत का आदर्श और प्रेरणा तीनों लोकों में फैली हुई है, अर्थात् वे अपने दिव्य गुणों के कारण सबके दिलों में प्रिय हैं।
  • “यह दुख दुर्गति न जाय” इस भाग में कहता है कि जिन्होंने संतों की सेवा और उनके संग्रहण का मान किया है, उनका दुख और दुर्गति नहीं हो सकता है।

जनक सुता मैं सो चितलाई, सिया पति पूजी।
हरि हरि मिल जपत अति सुख पावत सो हीतकारी॥

Ganesh Chalisa Lyrics in Hindi अर्थ

  • “जनक सुता मैं सो चितलाई” इस भाग में कहता है कि जनक की सुती अर्थात् सीता माता मैंने उनका चितान किया, अर्थात् उनकी महिमा का वर्णन किया।
  • “सिया पति पूजी” यहाँ पर कहता है कि सीता पतिव्रता होने के कारण भगवान श्रीराम की पूजा की है।
  • “हरि हरि मिल जपत अति सुख पावत सो हीतकारी” इस भाग में कहता है कि जो भक्त हरि के नाम का जप करते हैं, वे अत्यंत सुख प्राप्त करते हैं, और उन्हें सुख देने वाले होते हैं।

विद्यावान गुणी अति चातुर, रामकाज करिबे को।
राम रसायन तुम्हरे पासा, सदा रहो रघुपति के दासा॥

Ganesh Chalisa Lyrics in Hindi अर्थ

  • “विद्यावान गुणी अति चातुर” इस भाग में कहता है कि हनुमान जी विद्यावान हैं, अर्थात् उनके पास विशेष ज्ञान है, वे गुणशील हैं और अत्यंत चतुर हैं।
  • “रामकाज करिबे को” यहाँ पर कहता है कि हनुमान जी रामकाज करने के लिए तत्पर हैं, अर्थात् वे भगवान राम के कार्यों को समर्पित हैं।
  • “राम रसायन तुम्हरे पासा” इस भाग में कहता है कि हनुमान जी के पास भगवान राम का अमृत रस है, अर्थात् वे भगवान राम के आदर्श और गुणों का सच्चा अनुभव करते हैं।
  • “सदा रहो रघुपति के दासा” इस भाग में कहता है कि हनुमान जी हमेशा रघुपति (भगवान राम) के दास रहें, अर्थात् वे उनके सेवक बने रहें।

तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना, लंकेश्वर भए सखा।
संकट से हनुमान छुड़ावै, मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥

Ganesh Chalisa Lyrics in Hindi अर्थ

  • “तुम्हरो मंत्र बिभीषण माना” इस भाग में कहता है कि बिभीषण ने हनुमान जी के मंत्र को माना, अर्थात् उनकी उपदेशना का पालन किया और उनके मंत्रों का प्रयोग किया।
  • “लंकेश्वर भए सखा” यहाँ पर कहता है कि बिभीषण ने हनुमान जी का सखा बनकर लंकापति बन गए, अर्थात् वे हनुमान जी के अच्छे मित्र बन गए।
  • “संकट से हनुमान छुड़ावै” इस भाग में कहता है कि हनुमान जी अपने भक्तों को संकट से छुड़ा सकते हैं, अर्थात् उनके प्रेम और सेवा से उनके भक्तों की संकटों का निवारण कर सकते हैं।
  • “मन क्रम बचन ध्यान जो लावै” यहाँ पर कहता है कि जो भक्त हनुमान जी के मंत्रों का सम्मान करते हैं, उनके अच्छे मनस्थिति से और उनकी उपदेशनाओं का ध्यान करके आत्मा को शुद्ध करते हैं, वे संकटों से मुक्त होते हैं।

सब पर राम तपस्वी राजा, तिनके काज सकल तुमसा।
और मनोरथ जो कोई लावै, सोई अमित जीवन फल पावै॥

Ganesh Chalisa Lyrics in Hindi अर्थ

  • “सब पर राम तपस्वी राजा” इस भाग में कहता है कि भगवान राम सबके परम तपस्वी और राजा है, अर्थात् वे सबके सर्वोत्तम तपस्वी और राजा हैं।
  • “तिनके काज सकल तुमसा” यहाँ पर कहता है कि हनुमान जी, तुमसे ही सभी काम संभव हैं, अर्थात् वे ही सभी काम कर सकते हैं और सभी की सहायता कर सकते हैं।
  • “और मनोरथ जो कोई लावै” इस भाग में कहता है कि जो भी व्यक्ति भगवान राम की शरण में आता है और उनसे कोई मनोरथ मांगता है, वह अमित जीवन के फल को प्राप्त करता है।

चारों युग परताप तुम्हारा, है परसिद्ध जगत उजियारा।
साधु संत के तुम रखवारे, असुर निकंदन रामदूत बारे॥

Ganesh Chalisa Lyrics in Hindi अर्थ

  • “चारों युग परताप तुम्हारा” इस भाग में कहता है कि हनुमान जी का पराक्रम और महिमा चारों युगों में प्रसिद्ध है, अर्थात् उनके उपकार और वीरता युगों-युगों तक प्रमाणित है।
  • “है परसिद्ध जगत उजियारा” यहाँ पर कहता है कि हनुमान जी के उपकारों से जगत् की उजियारा होती है, अर्थात् उनके द्वारा आई प्रकाशमयी ज्ञान से जगत् का प्रकाशित होने वाला होता है।
  • “साधु संत के तुम रखवारे” इस भाग में कहता है कि हनुमान जी साधु और संतों के रक्षक होते हैं, अर्थात् वे साधु और संतों की सेवा करते हैं और उनकी सुरक्षा करते हैं।
  • “असुर निकंदन रामदूत बारे” यहाँ पर कहता है कि हनुमान जी असुरों के नाशक, भगवान राम के दूत, और उनके शक्तिशाली भक्त होते हैं।

अस कहि श्रीपति कंठ लगावै, सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।
नारद सारद सहित अहिशा, यम कुबेर दिगपाल जहाँ ते॥

Ganesh Chalisa Lyrics in Hindi अर्थ

  • “अस कहि श्रीपति कंठ लगावै” इस भाग में कहता है कि भगवान श्रीराम के नाम और रूप का स्तुति करने से हनुमान जी उनके कंठ में बस जाते हैं, अर्थात् वे भगवान के प्रति अत्यंत भक्ति और समर्पण रखते हैं।
  • “सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा” यहाँ पर कहता है कि हनुमान जी के चरणों में सनकादि मुनियों, ब्रह्मा आदि ऋषियों की भक्ति रहती है, अर्थात् वे सभी देवर्षि और मुनियाँ हनुमान जी की सेवा करते हैं।
  • “नारद सारद सहित अहिशा” इस भाग में कहता है कि हनुमान जी के चरणों में नारद ऋषि, सारद ऋषि, और अहिरावण भी आदर करते हैं, अर्थात् वे सभी भगवान के भक्त हनुमान जी के प्रति श्रद्धाभक्ति रखते हैं।
  • “यम कुबेर दिगपाल जहाँ ते” इस भाग में कहता है कि हनुमान जी के चरणों में यमराज, कुबेर, और दिगपालक देवताएँ भी स्तुति करती हैं, अर्थात् वे सभी देवताएँ हनुमान जी की पूजा करती हैं।

कबि कोबिद कहि सकें कहानी, तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।
राम मिलाय राजपद दिन आनी, तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना॥

Ganesh Chalisa Lyrics in Hindi अर्थ

  • “कबि कोबिद कहि सकें कहानी” इस भाग में कहता है कि कवियों और ज्ञानियों को भी आपकी महिमा की कहानी कहने में समर्थ्य नहीं होता, अर्थात् आपकी महिमा को शब्दों में व्यक्त करना कठिन होता है।
  • “तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा” यहाँ पर कहता है कि आपने सुग्रीव के प्रति उपकार किया है, अर्थात् आपने उनकी मदद की है।
  • “राम मिलाय राजपद दिन आनी” इस भाग में कहता है कि आपने भगवान राम से मिलाकर सुग्रीव को उसका राज्य पुनः प्राप्त कराया है, अर्थात् आपने उनका सुखी राजपद पुनराधिकृत किया है।
  • “तुम्हरो मंत्र बिभीषण माना” इस भाग में कहता है कि बिभीषण ने आपके मंत्र को माना और आपकी सलाह का पालन किया, अर्थात् उन्होंने आपके उपदेशों का पालन किया।

जिनके काज सखा के तुम, तीनों लोक है तुम्हारे।
भूतपिशाच निकट नहिं आवै, महाबीर जब नाम सुनावै॥

Ganesh Chalisa Lyrics in Hindi अर्थ

  • “जिनके काज सखा के तुम” इस भाग में कहता है कि जिनके काम भगवान राम के सखा होते हैं, वे सभी काम हनुमान जी के लिए संभव होते हैं।
  • “तीनों लोक है तुम्हारे” यहाँ पर कहता है कि हनुमान जी तीनों लोकों में व्याप्त हैं, अर्थात् वे सभी लोकों में प्रसिद्ध हैं और उनके उपकार व्यापक हैं।
  • “भूतपिशाच निकट नहिं आवै” इस भाग में कहता है कि हनुमान जी के नाम का जाप करने से भूतों और पिशाचों की उपस्थिति नहीं हो सकती, अर्थात् वे सभी शक्तियों से ऊपर हैं।
  • “महाबीर जब नाम सुनावै” इस भाग में कहता है कि हनुमान जी के महावीर रूप का नाम सुनकर, जब उनकी महिमा का स्मरण किया जाता है, तो सभी बुराईयों और कठिनाइयों का नाश होता है।

नासै रोग हरै सब पीरा, जपत निरंतर हनुमत बीरा।
संकट तें हनुमान छुड़ावै, मन क्रम वचन ध्यान जो लावै॥

Ganesh Chalisa Lyrics in Hindi अर्थ

  • “नासै रोग हरै सब पीरा” इस भाग में कहता है कि हनुमान जी के जप से सभी बीमारियाँ और पीड़ाएँ नष्ट हो जाती हैं, अर्थात् उनके नाम का जाप करने से सभी रोगों का नाश होता है।
  • “जपत निरंतर हनुमत बीरा” यहाँ पर कहता है कि हनुमान जी के नाम का जाप निरंतर किया जाना चाहिए, अर्थात् उनकी भक्ति और जप का अनवश्यक नहीं रुकना चाहिए।
  • “संकट तें हनुमान छुड़ावै” इस भाग में कहता है कि हनुमान जी के जप और भक्ति से सभी संकटों से मुक्ति प्राप्त होती है, अर्थात् उनके प्रति श्रद्धा और भक्ति से सभी कठिनाइयाँ दूर होती हैं।
  • “मन क्रम वचन ध्यान जो लावै” इस भाग में कहता है कि जो भक्त हनुमान जी के प्रति मनन, क्रम, वचन, और ध्यान लाता है, उसके सभी संकटों का नाश होता है।

सब पर राम तपस्वी राजा, तिनके काज सकल तुमसा।
और मनोरथ जो कोई लावै, सोई अमित जीवन फल पावै॥

Ganesh Chalisa Lyrics in Hindi अर्थ

  • “सब पर राम तपस्वी राजा” इस भाग में कहता है कि राम भगवान सभी लोगों के राजा हैं, उनके शासन में ही सब कुछ होता है, और वे सभी के श्रेष्ठ तपस्वी हैं।
  • “तिनके काज सकल तुमसा” यहाँ पर कहता है कि हनुमान जी ही सभी कामों के प्रबंधक हैं, उनके बिना कुछ भी संभव नहीं है।
  • “और मनोरथ जो कोई लावै” इस भाग में कहता है कि जो भी व्यक्ति अपनी मनोकामना को पूरी करने के लिए हनुमान जी की शरण में आता है, उसको अमित (अनंत) जीवन के फल प्राप्त होते हैं।

चारों युग परताप तुम्हारा, है परसिद्ध जगत उजियारा।
साधु संत के तुम रखवारे, असुर निकंदन रामदूत बारे॥

Ganesh Chalisa Lyrics in Hindi अर्थ

  • चारों युग परताप तुम्हारा” इस भाग में कहता है कि हनुमान जी का पराक्रम चारों युगों में प्रसिद्ध है, उनकी शक्तियाँ सभी युगों में दिखाई देती हैं।
  • “है परसिद्ध जगत उजियारा” यहाँ पर कहता है कि हनुमान जी की प्रसिद्धि पूरी दुनिया में है, उनकी महिमा सभी लोकों को प्रकाशित करती है।
  • “साधु संत के तुम रखवारे” इस भाग में कहता है कि हनुमान जी साधुओं और संतों के रक्षक हैं, उनकी रक्षा करते हैं, और उनकी सेवा में लगे रहते हैं।
  • “असुर निकंदन रामदूत बारे” इस भाग में कहता है कि हनुमान जी असुरों का नाश करने वाले हैं, वे भगवान राम के दूत हैं, और उनका संकटमोचन कार्य करते हैं।

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा, नारद सारद सहित अहिशा।
यम कुबेर दिगपाल जहाँ ते, कबि कोबिद कहि सकें कहानी॥

Ganesh Chalisa Lyrics in Hindi अर्थ

  • “सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा” इस भाग में कहता है कि हनुमान जी के प्रति सनकादि मुनियों और ब्रह्मा आदि महर्षियों की श्रद्धा और पूजा होती है, अर्थात् उनके सम्मान में सभी महर्षियों का रुचि होता है।
  • “नारद सारद सहित अहिशा” यहाँ पर कहता है कि हनुमान जी के प्रति नारद और सारद जैसे महर्षियों की भी श्रद्धा होती है, और उनके सम्मान में सभी महर्षियों का रुचि होता है।
  • “यम कुबेर दिगपाल जहाँ ते” इस भाग में कहता है कि हनुमान जी के प्रति यमराज, कुबेर, और दिगपाल (दिशा के रक्षक देवता) की भी श्रद्धा होती है, और उनके सम्मान में सभी देवताओं का रुचि होता है।
  • “कबि कोबिद कहि सकें कहानी” यहाँ पर कहता है कि कवि और ज्ञानियों की शक्तियाँ भी हनुमान जी की महिमा को समझने में असमर्थ हैं, और उनके गुणों की कथा कविता द्वारा व्यक्त नहीं की जा सकती।

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा, राम मिलाय राजपद।
तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना, लंकेश्वर भए सखा॥

Ganesh Chalisa Lyrics in Hindi अर्थ

  • तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा” इस भाग में कहता है कि हनुमान जी ने सुग्रीव की सहायता करके उसके साथ दोस्ती की, उन्होंने सुग्रीव का उपकार किया।
  • “राम मिलाय राजपद” यहाँ पर कहता है कि हनुमान जी ने राम भगवान के साथ मिलकर सुग्रीव को उसके राज्य की पुनर्स्थापना कराई, उन्होंने सुग्रीव को उसके राजपद की प्राप्ति में सहायता की।
  • “तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना” इस भाग में कहता है कि हनुमान जी के मंत्र को बिभीषण ने माना और उसके साथ युद्ध करके लंका का राजा बना, उन्होंने हनुमान जी के मार्गदर्शन में राम की सेवा की।
  • “लंकेश्वर भए सखा” यहाँ पर कहता है कि बिभीषण ने हनुमान जी के प्रेरणा और मार्गदर्शन से राम की भक्ति की और उनके शरण में आकर वे उनके सखा बने, उन्होंने लंका के राजा के रूप में उनकी सेवा की।

संकट से हनुमान छुड़ावै, मन क्रम वचन ध्यान जो लावै।
सब पर राम तपस्वी राजा, तिनके काज सकल तुमसा॥

Ganesh Chalisa Lyrics in Hindi अर्थ

  • “संकट से हनुमान छुड़ावै” इस भाग में कहता है कि हनुमान जी संकटों से भक्तों को उद्धार करते हैं, उनकी कृपा से उन्हें संकटों से मुक्ति मिलती है।
  • “मन क्रम वचन ध्यान जो लावै” यहाँ पर कहता है कि जो भक्त हनुमान जी का चित्त, क्रम, वचन, और ध्यान अपनी सेवा में लगाता है, उन्हें हनुमान जी की कृपा मिलती है।
  • “सब पर राम तपस्वी राजा” इस भाग में कहता है कि राम भगवान सभी की रक्षा करने वाले हैं, वे तपस्वी हैं और सभी जगत के राजा हैं।
  • “तिनके काज सकल तुमसा” यहाँ पर कहता है कि सभी कार्यों का प्रबंधन हनुमान जी ही करते हैं, उनके बिना कुछ भी संभव नहीं है।

और मनोरथ जो कोई लावै, सोई अमित जीवन फल पावै।
चारों युग परताप तुम्हारा, है परसिद्ध जगत उजियारा।
साधु संत के तुम रखवारे, असुर निकंदन रामदूत बारे॥

Ganesh Chalisa Lyrics in Hindi अर्थ

  • “और मनोरथ जो कोई लावै, सोई अमित जीवन फल पावै” इस भाग में कहता है कि जो भी व्यक्ति हनुमान जी की भक्ति में मनोरथ या इच्छा को पूरा करने के लिए आवश्यक संकल्प लाता है, वह अमित (अनन्त) जीवन के फल को प्राप्त करता है।
  • “चारों युग परताप तुम्हारा” यहाँ पर कहता है कि हनुमान जी का पराक्रम चारों युगों में प्रसिद्ध है, उनकी शक्तियाँ सभी युगों में दिखाई देती हैं।
  • “है परसिद्ध जगत उजियारा” यहाँ पर कहता है कि हनुमान जी की प्रसिद्धि पूरी दुनिया में है, उनकी महिमा सभी लोकों को प्रकाशित करती है।
  • “साधु संत के तुम रखवारे” इस भाग में कहता है कि हनुमान जी साधुओं और संतों के रक्षक हैं, उनकी रक्षा करते हैं, और उनकी सेवा में लगे रहते हैं।
  • “असुर निकंदन रामदूत बारे” इस भाग में कहता है कि हनुमान जी असुरों का नाश करने वाले हैं, वे भगवान राम के दूत हैं, और उनका संकटमोचन कार्य करते हैं।

यही अर्थ है “गणेश चालीसा” के श्लोकों का, जो भगवान गणेश की महिमा गुण और उपासना का वर्णन करते हैं। यह चालीसा गणेश जी के प्रति भक्ति और श्रद्धा को प्रकट करती है और उनकी कृपा को प्राप्त करने की प्रार्थना करती है।

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