संकटनाशन गणेश स्तोत्र हिंदी अर्थ सहित – Bhakti Se Shakti

संकटनाशन गणेश स्तोत्र हिंदी अर्थ सहित जो भगवान गणेश की महिमा, गुण, और शक्तियों की प्रशंसा करता है। यह स्तोत्र उनके दिव्य और आदिशक्तिपूर्ण स्वरूप को समझने में मदद करता है और उनके आशीर्वाद की प्राप्ति के लिए प्रार्थना करता है। गणेश स्तोत्र के पाठ से व्यक्ति उनके जीवन में संकटों के निवारण, बुद्धि की वृद्धि, सफलता, और शांति की प्राप्ति की कामना करता है।

संकटनाशन गणेश स्तोत्र हिंदी अर्थ सहित :-

प्रणम्य शिरसा देवं गौरी विनायकम् ।
भक्तावासं स्मेर नित्यमाय्ः कामार्थसिद्धये II

अर्थ – “मैं गौरीविनायक को शिरसे नमस्कार करता हूँ। भक्तों का आश्रय होने वाले वह देव, मुझे नित्य आनंदित करता है और कामनाओं और आर्थिक योग्यता की प्राप्ति में सहायक होता है।”

प्रथमं वक्रतुडं च एकदंत द्वितीयकम् ।
तृतियं कृष्णपिंगात्क्षं गजववत्रं चतुर्थकम् II

अर्थ – यह श्लोक भगवान गणेश के चार अद्भुत रूपों का उल्लेख करता है। ये चार नाम उनके विभिन्न स्वरूपों को दर्शाते हैं और उनकी महिमा को गाते हैं।

  1. “प्रथमं वक्रतुडं” यह उनके प्रथम रूप को दर्शाता है, जिनमें वक्रतुण्ड नामक चिह्न उनके वक्र दंत (कुरुवे दंत) की ओर इशारा करता है।
  2. “द्वितीयकम् एकदंत” यह उनके द्वितीय रूप को दर्शाता है, जिसमें एकदंत नामक चिह्न उनके एक ही दंत की ओर इशारा करता है।
  3. “तृतियं कृष्णपिंगात्क्षं” यह उनके तृतीय रूप को दर्शाता है, जिसमें कृष्णपिंगातक्ष नामक चिह्न उनकी काले रंग की आँखों की ओर इशारा करता है।
  4. “चतुर्थकम् गजवदन्त्रं” यह उनके चतुर्थ रूप को दर्शाता है, जिसमें गजवदन्त्र नामक चिह्न उनके गज (हाथी) के समान दंतों की ओर इशारा करता है।
संकटनाशन गणेश स्तोत्र हिंदी अर्थ सहित



लंबोदरं पंचम च पष्ठं विकटमेव च ।
सप्तमं विघ्नराजेंद्रं धूम्रवर्ण तथाष्टमम् II

अर्थ – “पांचवें रूप में वे लंबोदर हैं, छठवें रूप में वे पष्ठ हैं, सातवें रूप में वे विघ्नराजेंद्र हैं, आठवें रूप में वे धूम्रवर्ण हैं।”

नवमं भाल चंद्रं च दशमं तु विनायकम् ।
एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजानन् II

अर्थ – “नौवें रूप में वे भालचंद्र हैं, दसवें रूप में वे विनायक हैं। ग्यारहवें रूप में वे गणपति हैं, बारहवें रूप में वे गजानन हैं।”

द्वादशैतानि नामानि त्रिसंघ्यंयः पठेन्नरः ।
न च विघ्नभयं तस्य सर्वसिद्धिकरं प्रभो II

अर्थ – “जो व्यक्ति त्रिसंघा संयुक्त द्वादश नामों का पाठ करे, उसके लिए विघ्न और भय का कोई स्थान नहीं होता, हे प्रभो! वह सब सिद्धियों का कारण बनता है।”

विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम् ।
पुत्रार्थी लभते पुत्रान्मो क्षार्थी लभते गतिम्  II

अर्थ – “जो व्यक्ति विद्या के लिए प्रयत्नशील होता है, उसे विद्या प्राप्त होती है। जो धन की प्राप्ति के लिए प्रयत्नशील होता है, उसे धन प्राप्त होता है। जो पुत्र की प्राप्ति के लिए प्रयत्नशील होता है, उसे पुत्र प्राप्त होते हैं। और जो मोक्ष की प्राप्ति के लिए प्रयत्नशील होता है, उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।”

जपेद्णपतिस्तोत्रं षडिभर्मासैः फलं लभते ।
संवत्सरेण सिद्धिंच लभते नात्र संशयः II

अर्थ – “जो व्यक्ति षड् वर्ष में पति स्तोत्र का जप करता है, उसे तत्काल फल प्राप्त होता है। और एक संवत्सर में वह सिद्धि प्राप्त करता है, इसमें कोई संदेह नहीं है।”

अष्टभ्यो ब्राह्मणे भ्यश्र्च लिखित्वा फलं लभते ।
तस्य विद्या भवेत्सर्वा गणेशस्य प्रसादतः II

अर्थ – “आठ ब्राह्मणों को श्री लिखकर देने से व्यक्ति को तत्काल फल प्राप्त होता है। उसकी विद्या सभी प्रकार की हो जाती है, भगवान गणेश के प्रसाद से।”

॥ इति श्री नारद पुराणे संकष्टनाशनं नाम श्री गणपति स्तोत्रं संपूर्णम् ॥

अर्थ – “यह श्री नारद पुराण के अंतर्गत ‘संकष्टनाशनं नाम श्री गणपति स्तोत्र’ संपूर्ण है।”

गणेश स्तोत्र का जाप कैसे करे?

गणेश स्तोत्र का जाप करने के लिए निम्नलिखित चरणों का पालन करें:

  1. तैयारी और स्थिति: जाप करने से पहले अपने मन को शांत करें और शुद्धता की भावना बनाएं। एक सुखद और शांतिपूर्ण स्थान चुनें जहां आप बिना बाधित हो सकें।
  2. माला का चयन: एक जाप माला का चयन करें, जिसमें १०८ मनियों होती है।
  3. प्रारंभ और आवाहन: अपने मन में गणेश भगवान का ध्यान करें और उन्हें अपने मन में आवाहित करें।
  4. मंत्र का जाप: “ॐ गं गणपतये नमः” का जाप करें। माला के हर मनी पर मंत्र की एक मनी का जाप करें।
  5. भावना और समर्पण: मंत्र के जाप के दौरान, गणेश भगवान के सामने आपके आदर्श, इच्छाएं और अर्पण करें।
  6. ध्यान और मेधा: जाप करते समय अपने मन को मंत्र के अर्थ पर ध्यान केंद्रित करें, और गणेश भगवान की कृपा के लिए प्रार्थना करें।
  7. समापन और प्रार्थना: जब आप संख्या की पूरी कर लें, तो अंत में गणेश भगवान से आशीर्वाद और समृद्धि की प्रार्थना करें।
  8. ध्यानावस्था से बाहर न निकलें: जाप के बाद आपके विचार और भावनाएं शुद्ध और सकारात्मक रहें।

गणेश स्तोत्र का नियमित जाप करने से आप अपने जीवन में सफलता, शांति और सुख की प्राप्ति कर सकते हैं। यह आपके मन को शुद्ध करने, संकष्टों को दूर करने और गणेश भगवान की कृपा प्राप्त करने में मदद कर सकता है।

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